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तंत्र-1 मित्रभेद अनुक्रमणिका

  पञ्च तन्त्र   तंत्र-1   मि त्र भे द   अनुक्रमणिका     कथा मुखम्   प्र स्तावना कथा 1 कीलोत्पाटि वानर कथा 2 श्रुगाल दुन्दुभि कथा 3 दन्तिल गोरभ्ययोः कथा 4 दूती जम्बुकाषाढभूति कथा 5 विष्णुरूप धृक्कौलिक कथा 6 काकी- कृष्णसर्प- कथा 7 बक- कर्कटक -कथा 8 सिंह -शशक -कथा 9 मन्दविसर्पिणी - मत्कुण कथा 10 चण्डरव- शृगाल कथा 11 उष्ट्र- काकादि कथा 12 टिट्टिभ -समुद्र कथा 13 मूर्ख- कच्छप कथा 14 मत्स्य त्रय कथा 15 चटक -कुञ्जर कथा 16 सिंह - श्रुगाल कथा 17 सूचीमुख -वानरयूथ कथा 18 वानर- चटकदम्पति -कथा 19 ...

कथामुखम्

  कथा मुखम् ॥ श्री गणेशाय नमः ॥ ॥   पंचतंत्र कथामुख ॥ (वृत्त -स्रग्धरा; अक्षरे – 21; गण – म र भ न य य य ; यति- 7, 7, 7. ) ब्रह्मा रुद्रः कुमारो हरिवरुणयमा वह्निरिन्द्रः कुबेर – श्चन्द्रादित्यौ   सरस्वत्युदधियुगनगा वायुरुर्वी भुजङ्गाः। सिद्धा नद्योऽश्विनौ श्रीर्दितिरदितिसुता मातरश्चण्डिकाद्या वेदास्तीर्थानि यज्ञा गणवसुमुनयः पान्तु नित्यं ग्रहाश्च॥ 1 ॥ (वृत्त -स्रग्धरा; अक्षरे – 21; गण – म र भ न य य य ; यति- 7, 7, 7. ) रक्षावे नित्य सर्वां विधि , हर , हरिने , स्कंद , अग्नी , यमाने इंद्राने , सूर्य , चंद्रे , वरुण , उदधिने , यक्षराजा कुबेरे रक्षावे शारदेने, पवन, अवनिने, सिद्ध वर्गे, भुजंगे सार्‍या ह्या पर्वतांनी, सकलचि सरिता, दैत्यमाता दितीने ।। 1.1 ।। लक्ष्मी, देवादिवृंदे, सकल युग सवे चारही वेद यांने सारी ही पुण्य-तीर्थे, सकल शिवगणे अश्विनी देववैद्ये रक्षावे चंडिकेने जगत मुनिगणे सर्व यज्ञेच तैसे आकाशीच्या ग्रहांनी, सकल वसुगणे लोक तीन्ही जपावे ।। 1.2 ।। ( वृत्त – आर्या. ) मनवे वाचस्पतये शुक्राय पराशराय ससुताय। चाणक्याय च विदुषे न...